Publish Date: | Mon, 06 Mar 2023 02:26 PM (IST)
Indore News: इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। सामाजिक वानिकी (इंदौर) ने विस्तार वानिकी एवं कृषि वानिकी योजना के लिए किसान सम्मेलन एवं कार्यशाला आयोजित की। जहां किसानों की विस्तार वानिकी एवं कृषि वानिकी योजनाओं के माध्यम से आय दोगुनी करने के बारे में बताया। मुख्य अतिथि पूर्व एपीसीसीएफ पीसी दुबे ने कहा कि सामाजिक वानिकी और कृषि विभाग में आपस में तालमेल बैठाकर कृषि वानिकी को बढ़ा दिया जा सकता है। उन्नत पौधों को किसानों को अधिक से अधिक लगवाए। आय बढ़ने के साथ ही पर्यावरण भी संतुलित रहता है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार वन विस्तार की योजना पर काम करने में लगी है। अब ऐसी प्रजातियों के पौधों को खेतों में लगाने पर प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे पर्यावरण को बनाए रखने में आसानी होगी। यहां तक खेती के लिए सरकार किसानों को आर्थिक सहायता भी प्रदान करने में लगी है। कृषि वानिकी में 10 प्रतिशत पौधे किसानों की भूमि पर लगाने से जलवायु में सुधार होगा। किसानों की आय दुगनी होगी। मुख्य वनसंरक्षक नरेंद्र कुमार सनोडिया ने किसान पंचायत सरकारी कार्यालय एवं आवासों में लगाने के लिए जानकारी दी गई। हर्रा, चहेड़ा, आंवला, त्रिफला वन के साथ साथ त्रिवेणी वाटिका, पंचवटी वाटिका लगाने पर जोर दिया।
कृषकों को निजी भूमि पर उत्पादकता बढ़ाने से आय दोगुनी होगी। साथ ही अधिक से अधिक पौधारोपण करने के लिए ग्रामीणों को प्रेरित किया। वृक्ष मित्र रविन्द्रसिंह ने किसानों के कृषि वानिकी में सागौन, खमेर, नीम, शीशम सहित अन्य प्रजातियों के पेड़ों को खेतों की मेड़ों पर लगाने के बारे में कहा। उन्होंने कहा कि पेड़ों को खेतों की मेड पर लगाने से फसल सुरक्षित रहती है। साथ ही आसपास का पर्यावरण भी संतृलित रहती है। वहीं भूमि की उर्वरा शक्ति भी बढ़ती है। इससे फलीदार खेती करने जैसे मटर, चना, अरहर, मूंग, उड़द को लगाने से नाईट्रोजन फिक्सिंग जीवाणु अधिक रहते है।
प्रो. सरिता शर्मा ने जैविक खेती एवं प्राकृतिक खेती के महत्व की जानकारी दी गई। डा. विजयसिंह बुंदेला ने किसानों की भविष्य की जैविक एवं प्राकृतिक माडल खेती पर विचार रखे गए। सहायक वनसंरक्षक डी. पी. सिंह ने सामाजिक वानिकी ने बांस मिशन से किसानों को होने वाली आय के बारे में जानकारी दी गई। उन्होंने कहा कि बांस एक बहुउपयोगी लाभदायक पौधा हैं जिसे मेढ़ एवं खेत में लगाकर लगातार 05 वर्ष बाद 40 वर्ष तक मेड़ पर 85 भिर्रा तीन-तीन मीटर की दूरी पर लगाकर लगभग तीस हजार रुपये प्रतिवर्ष कमाया जा सकता है एवं भिरों की फेंसिंग से खेत की जानवरों से सुरक्षा भी होती रहेगी। संचालन रेंजर सुभाष शाकल्य ने किया।
Posted By: Sameer Deshpande
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